क्या अभ्यर्थियों के साथ हो रहा है अत्याचार और शोषण? 8 साल से बीएसएससी अभ्यर्थियों का नियुक्ति प्रक्रिया है अटकी

पटना: बिहार कर्मचारी चयन आयोग के द्वारा 2014 में निकली इंटर स्तरीय वेकेंसी की नियुक्ति प्रक्रिया 8 साल से लंबित चल रही है। पिछले साल दिसंबर में अभ्यर्थी का काउंसलिंग की प्रक्रिया पूरी की गई थी। लेकिन अब तक मेरिट लिस्ट जारी नहीं किया गया।

हजारों अभ्यर्थियों का है जुड़ा भविष्य

दरअसल यह मामला पटना उच्च न्यायालय में पहुंच गया है। इस बारे में 6 अप्रैल को सुनवाई के लिए डेट लिस्टिंग  होनी थी मगर 6 अप्रैल को भी सुनवाई की तारीख नहीं जारी की गयी । जिससे मुद्दा बहुत ही पेचीदा होता जा रहा है। अभ्यर्थी का धैर्य अब जबाब देने लगा है। कोर्ट को चाहिए की इस मुद्दे पर बिना विलंब किए सुनवाई करे। क्योंकि इससे हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य जुड़ा हुआ है।

यह है पूरा मामला

बता दे पूरा मामला ओल्ड एनसीएल (Non Creamy Layer) और न्यू एनसीएल (Non Creamy Layer) का है और कुछ मामले बायोमेट्रिक मिस मैच का भी है। बीएसएससी का कहना है कि 2014 तक या उससे पहले का ही एनसीएल मान्य होगा। उसके बाद का एनसीएल नहीं माना जाएगा। जिसके कारण कुछ अभ्यर्थियों ने कोर्ट में पिटीशन फाइल कर दिया है कि 2014 के बाद का न्यू एनसीएल माना जाय। इस कारण से मामला पटना हाई  कोर्ट में फंसा है और सभी कैटेगरी के अभ्यर्थियों का रिजल्ट बाधित है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि एक तो 7 साल के बाद काउंसलिंग की गई उस पर भी ओल्ड एनसीएल मांग कर बीएसएससी जानबूझकर नया बखेड़ा शुरू कर दी। इतना पुराना एनसीएल हर किसी के पास नहीं हो सकता है। इसलिए न्यू एनसीएल को बीएसएससी स्वीकार करे।

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