आसनसोल में स्थित 550 साल पुराना घाघर बुरी माता का प्राचीन मंदिर : जानिए इस मंदिर के पीछे का रहस्य

आसनसोल: पश्चिम बंगाल के आसनसोल में माँ घाघर बुरी का एक प्राचीन मंदिर स्थित है। जो माँ अम्बे की रूप मानी जाती है। मंदिर परिसर में माँ घाघर बुरी के साथ साथ माँ दुर्गा और भगवान पंचानन महादेव के पिंड की पूजा की जाती है। मान्यता है कि माँ घाघर बुरी अपने भक्तो की हर मुराद पूरी करते है। जिसके कारण मंदिर परिसर में प्रतिदिन भक्तो की भीड़ लगी रहती है।

मंदिर का इतिहास

मंदिर से जुड़ी मान्यता है कि 550 साल पहले  आसनसोल आसान पेडो का जंगल हुआ करता था।  वहां कंगाली चरण चक्रवर्ती नाम का व्यक्ति अपने परिवार के साथ रहता था। वह प्रतिदिन पूजा करने के लिए दूसरे गावं जाया करता था। जिसे नुनी नदी को पार करना पड़ता था । एक दिन लौटते समय थके होने की वजह से वहीं नदी किनारे सो गया, तभी उसे स्वप्न में माता ने दर्शन दिये। माता घाघर और गहने पहनी हुई थी। मां कंगाली चरण को तीन पिंड देती है  और कहती है अब तुम्हे नदी पार करके मंदिर जाने की जरुरत नहीं है । तुम इस तीन पिंडो का पूजा कर सकते हो। जब कंगाली चरण की निंद खुली तो सामने तीन पिंड पाया। उसने वहीं माता की पूजा शुरु कर दी। जिसके बाद से आज तक माता की पूजा अनावरत जारी है।

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घाघर बुरी मंदिर पश्चिम बंगाल, भारत में राष्ट्रीय राजमार्ग (बाईपास) के किनारे आसनसोल शहर के बाहरी इलाके में है। यह आसनसोल का सबसे पुराना मंदिर है। हर मंगलवार और शनिवार को पूजा का आयोजन किया जाता है। प्रत्येक वर्ष 15 जनवरी को यहाँ  मेला लगता है। पूजा के भाग के रूप में जानवरों की बलि दी जाती है।

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