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गुमला: महाशिवरात्रि में ढिढौली के प्राचीन शिव मंदिर में उमड़ी आस्था, सदियों पुराना है इस मंदिर का इतिहास

गुमला (झारखंड): महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर आज पूरे जिले में शिवभक्तों का तांता लगा हुआ है। इसी कड़ी में गुमला जिला के सुदूरवर्ती गाँव ढिढौली (Dhidhouli) स्थित प्राचीन शिव मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। सदियों पुराने इस मंदिर की महिमा इतनी अपार है कि दूर-दराज से लोग यहाँ महादेव के दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं।

मनोकामना पूर्ति का केंद्र

मान्यता है कि ढिढौली का यह शिव मंदिर अत्यंत जागृत है। स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि यहाँ जो भी भक्त सच्चे मन से कोई मन्नत मांगता है, भगवान भोलेनाथ उसे अवश्य पूरी करते हैं। यही कारण है कि आज शिवरात्रि के दिन यहाँ पैर रखने की भी जगह नहीं है और पूरा क्षेत्र ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गुंजायमान है।

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रहस्यमयी तालाब: जहाँ हाथी नहीं पीता पानी
इस मंदिर से जुड़ी एक और प्राचीन और अनोखी कहानी यहाँ के पास स्थित तालाब की है। स्थानीय लोककथाओं और बुजुर्गों के अनुसार, इस तालाब का पानी कभी भी हाथी नहीं पीता है। इस रहस्यमयी घटना के पीछे सदियों पुरानी एक पौराणिक कहानी छिपी है, जो आज भी कौतूहल का विषय बनी हुई है। मंदिर की प्राचीनता और इस चमत्कारी तालाब की वजह से इसकी ख्याति लगातार बढ़ रही है।

श्रद्धालुओं का जनसैलाब

महाशिवरात्रि को लेकर मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया गया है। सुबह की आरती के बाद से ही जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें देखी जा रही हैं। सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए स्थानीय युवाओं और प्रशासन की ओर से भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। सुदूरवर्ती इलाका होने के बावजूद, श्रद्धालुओं का उत्साह यह बताने के लिए काफी है कि ढिढौली का यह दरबार आस्था का एक बड़ा केंद्र बन चुका है।

परंपरा और भक्ति की गूँज: ढोल-नगाड़ों के साथ जलाभिषेक

मंदिर की प्राचीनता और आस्था के साथ-साथ यहाँ की पारंपरिक संस्कृति भी भक्तों को मंत्रमुग्ध कर रही है।महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर झारखंड की माटी की सोंधी खुशबू और लोक संगीत से सराबोर है।

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पारंपरिक वाद्य यंत्र: सुबह की पहली किरण के साथ ही ढोल और नगाड़ों की थाप ने पूरे ढिढौली गाँव को शिवमय कर दिया है।

शहनाई की गूँज : मंदिर के मुख्य द्वार पर गूँजती शहनाई की मधुर मंगल ध्वनि श्रद्धालुओं के मन में भक्ति का संचार कर रही है।

सांस्कृतिक उल्लास: स्थानीय कलाकारों द्वारा बजाए जा रहे इन पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूँज के बीच जब भक्त ‘हर-हर महादेव’ का जयघोष करते हैं, तो पूरा वातावरण अलौकिक हो उठता है। पुरानी परंपराओं को जीवित रखते हुए, इन वाद्य यंत्रों की गूँज सदियों पुराने इस मंदिर की भव्यता में चार चाँद लगा रही है।

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